Abhi to main chhoti hoon


अपने वजूद को ढूंढती हुई, मैं हूँ नन्ही सी परी
अभी तो मैं छोटी हूँ, मुझे न जाने दो इतना दूर

खेलना चाहती हूँ बहुत मैं,
उड़ना चाहती हूँ आसमानों में
देखना चाहती हूँ पंछियों को
और तैरना चाहती हूँ मछलियों के साथ

अपने वजूद को ढूंढती हुई, मैं हूँ नन्ही सी परी
अभी तो मैं छोटी हूँ, मुझे न जाने दो इतना दूर

कैसे कर पाऊंगी वोह सब
जो वोह लोग चाहते हैं मुझसे?
कैसे उठा पाऊंगी वोह बोझ
जो वोह लोग लादना चाहते हैं मुझपे?

अपने वजूद को ढूंढती हुई, मैं हूँ नन्ही सी परी
अभी तो मैं छोटी हूँ, मुझे न जाने दो इतना दूर

देखते नहीं हो, मुझ नन्ही सी जान को?
समझ नहीं सकते मैं छोटी हूँ?
मेरे सपनों का क्या होगा यह बताओ
जो मुझे बाँध दोगे बेडियों से

अपने वजूद को ढूंढती हुई, मैं हूँ नन्ही सी परी
अभी तो मैं छोटी हूँ, मुझे न जाने दो इतना दूर

जीवन में बचपन आता है एक बार
जी लेने दो बचपन को सौ सौ बार
क्यों धकेलना चाहते हो बोझ के इस भंवर में
मैं झेल नहीं पाऊंगी, टूट जाऊंगी

अपने वजूद को ढूंढती हुई, मैं हूँ नन्ही सी परी
अभी तो मैं छोटी हूँ, मुझे न जाने दो इतना दूर

मुझे न जाने दो इतना दूर,
मुझे न बांधो बेडियों से
उस पायल का क्या फायदा
जिसको पहन कर मैं चल न पाऊँ?

मुझे न जाने दो इतना दूर
अभी तो मैं छोटी हूँ
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

© Punam J R., all rights reserved.
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2 Comments

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