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>Meri Chaah

>

मेरी चाह

छोटे से दिल ने कई ख्वाब देखे थे
कई सालों तक उन्हें संजोकर रखे थे.
फिर आया वह पल जो उन ख़्वाबों को
कर देता, यदि सब ठीक तोह, हकीकत वह

हाय! क्या था मंज़ूर ख्हुदा को, यह न था पता,
उस छोटे से दिल को, ऐसे था कभी टूटना
एक आवाज़ तक नहीं हुई, एक आह तक न सुनी

किसी ने न पता चल सका किसी को, वह तकलीफ
दे रही थी दिल को ऐसी यातना
सह रहा था वह सब कुछ अकेले तनहा

ऐ खुदा यह क्या मज़ाक था, कैसा हास्य?
जिसमें पल पल रोना बिलखना था, ऐसा रहस्य
जीवन की पहेली हमें न समझ आई बिलकुल
यह कैसे थे कर्मों के पदचिह्न, आखिर?

मिटा देना चाहती हूँ, भुला देना चाहती हूँ
उन पदचिह्नों को लहरों के पानी से
नयी राह पर चलना चाहती हूँ
नए सपने बुनना चाहती हूँ
नया कल, नयी सुबह, नयी तमन्नाएं
सब कुछ मिटा कर, सब कुछ भुलाकर

फिर से जीना चाहती हूँ मैं
फिर से जीना चाहती हूँ मैं

Author:

Standing strong. Holding all.

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